व्रत क्या है
सत्यनारायण पूजा एक व्रत है — एक संकल्प के साथ किया जाने वाला अनुष्ठान। यह प्रायः कृतज्ञता के भाव से किया जाता है: नई नौकरी, स्वास्थ्य लाभ, विवाह, गृह क्रय के बाद, अथवा किसी भी पूर्णिमा को।
कब किया जाता है
पूर्णिमा प्रमुख दिन है। एकादशी, संक्रांति और किसी विशेष घटना के अगले दिन भी सामान्य हैं। किसी भी दिन किया जा सकता है — कोई निषेध नहीं है।
क्या होता है
पूजा गणपति आराधना और परिवार के गोत्र में संकल्प से आरंभ होती है। सत्यनारायण स्वामी का कलश अथवा चित्र में आवाहन कर षोडशोपचार अर्पित किए जाते हैं। व्रत का केंद्र कथा है, जो पाँच अध्यायों में पढ़ी जाती है।
प्रसाद सपाथा है — गेहूँ का रवा, चीनी या गुड़, घी और केला, समान मात्रा में। कोई भी बिना प्रसाद लिए नहीं जाता।
उपवास
व्रत करने वाला प्रातः से पूजा समाप्ति तक उपवास रखता है। फल और दूध ग्रहण किया जा सकता है। प्रसाद से उपवास तोड़ा जाता है।
